धर्मशाला कॉलेज छात्रा मौत मामले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने जांच समिति गठित कर दी है। इस मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। रैगिंग और उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए एक तथ्य जांच समिति (Fact Finding Committee) का गठन किया है।
UGC के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर UGC एंटी रैगिंग हेल्पलाइन ने स्वतः शिकायत दर्ज की थी। वहीं कॉलेज प्रशासन का दावा है कि यह मामला आत्महत्या का नहीं, बल्कि सामान्य मृत्यु का है, जिसे लेकर जांच और भी संवेदनशील हो गई है। UGC ने स्पष्ट किया है कि मामले की पुलिस जांच पहले से जारी है और समानांतर रूप से UGC की समिति पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच करेगी।
आयोग ने कहा है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने कॉलेज की तीन छात्राओं के खिलाफ रैगिंग और चोट पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। प्रोफेसर 19 साल की छात्रा के यौन उत्पीड़न के आरोप में नामित है। पीड़िता का 26 दिसंबर को लुधियाना के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था।
इस पूरे मामले में 1 जनवरी को छात्र के पिता की शिकायत पर केस दर्ज किया गया। अब पुलिस और UGC दोनों स्तरों पर जांच चल रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा, संवेदनशीलता और जवाबदेही को लेकर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
अभिभावकों, संस्थानों और सरका तीनों की साझा जिम्मेदारी है कि हर छात्र सुरक्षित माहौल में शिक्षा प्राप्त करे। यह मामला एक गंभीर चेतावनी है। फिलहाल सीएम सुक्खू के निर्देश पर आरोपी प्रोफेसर को निलंबित कर दिया गया है।

