अल्मोड़ा। देश के पहले पर्सनल फ्लाइंग (Flying) व्हीकल (Vehical) के शुरुआती परीक्षण (Test) की सफलता का दावा किया जा रहा है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के युवा इनोवेटर रवि टम्टा और उनकी टीम ने इसे तैयार किया है। यह उपलब्धि भविष्य में व्यक्तिगत परिवहन के क्षेत्र में नई क्रांति ला सकती है। उन्होंने HAPIDA SKYNeX नाम से एक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप विकसित किया है।

रवि टम्टा पिछले लगभग दस साल से इस परियोजना पर लगातार काम कर रहे थे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी टीम के साथ इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को साकार करने का प्रयास किया। हाल ही में अल्मोड़ा के एक मैदान में इस फ्लाइंग व्हीकल की प्रारंभिक टेस्ट फ्लाइट सफल रही, जिसे वे अपने शोध की बड़ी उपलब्धि मानते हैं।
रवि का दावा है कि यह भारत का अपनी तरह का पहला पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल है।

उनका कहना है कि यदि आगामी तकनीकी परीक्षण और सरकारी स्वीकृतियां सफलतापूर्वक पूरी हो जाती हैं तो यह तकनीक भविष्य में व्यक्तिगत परिवहन का स्वरूप बदल सकती है। उन्होंने बताया कि इस वाहन के माध्यम से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी, जिसे सड़क मार्ग से तय करने में करीब डेढ़ घंटा लगता है, को लगभग 12 मिनट में पूरा किया जा सकता है। रवि टम्टा ने कहा कि इस परियोजना को अभी बड़े स्तर पर उपयोग में लाने से पहले कई तकनीकी परीक्षण और सरकारी मंजूरियां प्राप्त करना आवश्यक है।

उन्होंने स्वीकार किया कि हवा में सुरक्षित संचालन जमीन पर वाहन चलाने की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है, इसलिए विकास की अगली प्रक्रिया में समय लगेगा। उन्होंने बताया कि इस तकनीक का सबसे अधिक लाभ मेडिकल इमरजेंसी, आपदा प्रबंधन, दुर्गम क्षेत्रों तक त्वरित पहुंच और ट्रैफिक जाम जैसी परिस्थितियों में मिल सकता है। उनका लक्ष्य भविष्य में इस तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाना है।

रवि टम्टा ने विश्वास जताया कि यदि विकास कार्य निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ता रहा तो आने वाले 8 से 10 वर्षों में पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल आम जीवन का हिस्सा बन सकता है। उनकी इस उपलब्धि को उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के नवाचार और तकनीकी क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण ( Important) कदम (Step) माना जा रहा है।

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