कांगड़ा। सीएम (CM) सुक्खू (Sukhu) ने मंगलवार शाम को बाण गंगा घाट का उद्घाटन किया। उन्होंने यहां संध्याकालीन आरती का भी आगाज करवाया। मंदिर प्रशासन कांगड़ा में बने इस नवनिर्मित बाण गंगा घाट पर रोजाना संध्याकालीन आरती का आयोजन करेगा।

हालांकि पहले दिन संध्याकालीन आरती के लिए कांगड़ा व चामुंडा से पुजारियों को बुलाया गया था। मंदिर न्यास संध्या कालीन आरती के लिए नियमित पुजारियों की तैनाती पर विचार कर रहा है, परंतु शुरुआती दिनों में कुछ पुजारियों को संध्याकालीन आरती के लिए तैनाती की गई है। प्रतिदिन होने वाली आरती यहां आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी।

इस धार्मिक स्थल का निर्माण शहीद कैप्टन शैलेश रियाल्च फाउंडेशन और जिला प्रशासन ने किया है। फाउंडेशन ने लगभग 1.5 करोड़ रुपये व्यय किए हैं, जबकि जिला प्रशासन कांगड़ा ने लगभग 70 लाख रुपये प्रदान किए हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने जिला कांगड़ा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है। इसके साथ ही धार्मिक पर्यटन को भी मजबूती प्रदान करने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि धर्म पर राजनीति करने वाले सोचें कि हमें लोगों का भला भी करना है और आस्था का सम्मान भी। हम सबको इस तरह के काम करने चाहिए।

धर्म पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। हमें राधे-राधे, राम-राम और जय साईं राम कहने से कोई परहेज नहीं है। हम इन शब्दों का प्रयोग करते हैं। मेरे बयान को काटकर पेश किया गया। पूरा बीजेपी का देशभर का सोशल मीडिया सेल मुझे बदनाम करने के लिए तरह-तरह की साजिश से रचता रहता है। मैंने जो बोला था, उसको तोड़-मोड़कर पेश किया गया। उन्होंने बच्चों से पूछा था कि राधे-राधे क्यों बोलते हैं, उनसे मैंने अर्थ पूछा था, लेकिन भाजपा ने काट कर इसको आगे बढ़ा दिया कि राधे-राधे क्यों बोलना। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश देवभूमि है और कांगड़ा का बज्रेश्वरी मंदिर देशभर से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। श्रद्धालु घाट पर जाकर स्नान भी करते हैं, इसलिए उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह घाट विकसित किया गया है, जिससे उन्हें स्नान और पूजा-अर्चना के लिए एक सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित स्थान उपलब्ध हो सके।

मुख्यमंत्री ने कांगड़ा प्रशासन को बाण गंगा को और विकसित करने के भी निर्देश दिए और कहा कि सरकार से जो बन पाएगा, वह करेगी। बाण गंगा घाट पर स्थापित होने वाले 30 फीट उंचे त्रिशूल का कार्य अगले सप्ताह तक पूरा होगा, परंतु घाट के शुभारंभ को लेकर त्रिशूल के कुछ अंश को स्थापित किया गया था। शहीद कैप्टन शैलेश रियाल्च फाउंडेशन के मुख्य संचालन कर्ता रजत रियाल्च ने मुख्यमंत्री को काले ग्रेनाइट में बनाए गए 30 फुट के त्रिशूल की संपूर्ण जानकारी दी।

रजत रियाल्च ने बताया कि पूरा त्रिशूल काले ग्रेनाइट में बनाया गया है। इसका डिजाइन कई शोघ के बाद फाइनल किया गया था। उन्होंने बताया कि तीस फीट त्रिशूल तीन पार्ट में जयपुर से कांगड़ा पहुंचा है। इसके स्थापित होने के बाद इस घाट को एक अलग पहचान मिलेगी। दूर से भी इस त्रिशूल को देखा जा सकता है। शहीद कैप्टन शैलेश रियाल्च नगरोटा बगवां के अंबाड़ी क्षेत्र से संबंध रखते थे। वह लगभग 25 वर्ष पूर्व शहीद हुए थे और उनकी स्मृति में इस फाउंडेशन ने घाट के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। घाट परिसर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए भव्य आरती स्थल, चेंजिंग रूम, शौचालय, आकर्षक मंच, सुंदर पार्क और बेहतर प्रकाश की व्यवस्था है। यहां संध्याकालीन आरती के साथ-साथ योगा सत्र और विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

मंदिर संयुक्त आयुक्त व उपमंडलाधिकारी कांगड़ा इंशात जसवाल ने बताया कि इसी वर्ष कांगड़ा बाईपास पर बाण गंगा घाट के निर्माण का एक सपना मंदिर न्यास ने सिंजोया था, जो कि एक वर्ष के भीतर ही जनता को समर्पित होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि बनेर खड्ड में बाण गंगा घाट के निर्माण से बनेर खड्ड में स्थानीय व श्रद्धालुओं के डूबने की घटनाओं पर विराम लगेगा और श्रद्धालुओं को एक बेहतर धार्मिक घाट मिलेगा। बाण गंगा घाट पर हरिद्वार की तर्ज पर संध्याकालीन आरती शुरू हो गई है, जो कि घाट पर प्रदेश की पहली संध्याकालीन आरती होगी। बाण गंगा घाट के बनने से कांगड़ा में आने वाले धार्मिक पर्यटकों के लिए एक विकसित पर्यटन स्थल मिलेगा।

बनेर खड्ड का पानी का बहाव को अस्थाई रूप से मोड़ा गया है, परंतु आने वाले दिनों में इस पर एक योजना के तहत पानी का बहाव होगा। बरसात में पानीे के तेज बहाव से नुक्सान न पहुंचे, इसके लिए बकायदा खाका तैयार हो रहा है। इसे अगली बरसात से पहले पूरा कर लिया जाएगा। बनेर खड्ड के पानी के बहाव से बाण गंगा घाट को बचाना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।

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