शिमला। वीबी-जी-राम-जी योजना लागू करना प्रदेश (State) के हित में नहीं है। यह योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बंद कर लाई गई है। यह बात सीएम सुक्खू (CM Sukhu) ने शिमला में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक (Meeting) में कही।

मनरेगा के तहत केंद्र सरकार (Center Government) 100 प्रतिशत धनराशि उपलब्ध करवाती थी, जबकि नई योजना में कुल खर्च का 10 प्रतिशत राज्य सरकार (State Government) को वहन करना होगा। इससे राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसलिए इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा।

बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। विभाग में रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जा रहा है। प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नई भर्तियां भी की जाएंगी। निर्माणाधीन पंचायत घरों को पूरा करने के लिए 30 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए जाएंगे।

ऊना में बन रहे जिला पंचायत संसाधन केंद्र के निर्माण कार्य हेतु भी अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध करवाई जाएगी। स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने के लिए अब तक 310 समूहों को 65.56 लाख रुपये की ऋण सहायता प्रदान की जा चुकी है। उनके उत्पादों के विपणन के लिए शिमला में ‘हिमाचल हाट’ का निर्माण किया जा रहा है।

समूहों को फूड वैन उपलब्ध करवाई गई हैं और भविष्य में ऐसी और वैन भी उपलब्ध करवाई जाएंगी। विभाग की सभी प्रमुख योजनाओं को मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से जोड़ने के निर्देश। बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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